भोपाल, 1 जुलाई। गांधी भवन भोपाल में एसआईआर, जनगणना एवं परिसीमन पर आयोजित बैठक में प्रख्यात चिंतक एवं भाषाविद् गणेश देवी ने कहा कि आगामी जनगणना और उसके बाद प्रस्तावित परिसीमन देश के सामाजिक, भाषाई और राजनीतिक भविष्य पर व्यापक…
पुणे/दिल्ली, 2 जुलाई । पुणे के प्रतिष्ठित संस्थान ‘शंकर ब्रह्मे समाज विज्ञान ग्रंथालय’ ने वर्ष 2026 के लिए अपनी विशेष रिसर्च एवं बुक-राइटिंग फेलोशिप की घोषणा की है। इस वर्ष यह फेलोशिप लेखक, कवि और सामाजिक कार्यकर्ता विनीत तिवारी को…
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भाषाओं को धर्म से जोड़ना सबसे बड़ी ऐतिहासिक भूल, भारतीय भाषाओं का दस्तावेजीकरण अंतिम चरण में रिपोर्ट : कुमार सिद्धार्थ भोपाल, 30 जून। प्रख्यात भाषाविद् एवं साहित्यकार डॉ. गणेश देवी ने कहा कि भारत आज भी दुनिया के सबसे समृद्ध…
30 जून 1855 को संथालों ने केवल अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध हथियार नहीं उठाए, बल्कि जल, जंगल और जमीन पर अपने अधिकार की ऐतिहासिक घोषणा भी की। 171 वर्ष बाद भी ‘हूल’ केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि विस्थापन, संसाधनों…
क्या किसी नागरिक की पहचान उसके जीवन, समाज और इतिहास से तय होगी या केवल सरकारी अभिलेखों से? वरिष्ठ पत्रकार आर. राजगोपाल का मामला इस प्रश्न को नई गंभीरता से सामने लाता है। जब पासपोर्ट, आधार और मतदाता पहचान पत्र…
जंगल सिमट रहे हैं और वन्यजीव गांवों की ओर बढ़ रहे हैं। खेतों में हाथी, बस्तियों में तेंदुए और गांवों की चौखट तक पहुंचते बाघ केवल वन्यजीव संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि असंतुलित विकास की चेतावनी हैं। सवाल यह नहीं…
आंकड़े केवल संख्याएं नहीं होते, वे समाज की वास्तविक तस्वीर और भविष्य की दिशा भी बताते हैं। सरकारों की योजनाओं से लेकर मौसम की चेतावनी, जनगणना, रोजगार और आर्थिक विकास तक हर महत्वपूर्ण निर्णय सांख्यिकी पर आधारित होता है। राष्ट्रीय…
भोपाल, 28 जून। भारत की भाषाई विविधता, विलुप्त होती बोलियों और मातृभाषाओं के भविष्य पर देश के सबसे प्रतिष्ठित भाषा-चिंतकों में से एक प्रो. जीएन डेवी 30 जून को भोपाल में व्याख्यान देंगे। ‘हम सब’ और गांधी भवन के संयुक्त…
कुछ लोग अपने जाने के बाद भी स्मृतियों से नहीं, अपने विचारों और कर्मों से जीवित रहते हैं। वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ झा ऐसे ही विरल व्यक्तित्व थे, जिन्होंने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज, नदी, जल, जंगल और मनुष्य…