जनगणना 2027 : डिजिटल युग में भारत की सामाजिक-राजनीतिक पुनर्रचना
अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया
लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी…
सोनम वांगचुक : अनशन नहीं, सत्ता का चरित्र बदला है
सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब केवल शिक्षा सुधार या एक मंत्री की जवाबदेही का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिरोध की प्रभावशीलता की भी परीक्षा बन चुका है। इसी बीच न्यायालय ने उनके जीवन की रक्षा को…
यात्रा-वृत्तांत : अनोखी है बैतूल की भू-संस्कृति
भारत की विविध भू-संस्कृतियों की खोज में बैतूल एक ऐसा पड़ाव है, जहाँ प्रकृति, लोकजीवन, आस्था और सामुदायिक संस्कृति एक-दूसरे में सहज रूप से घुली-मिली दिखाई देती हैं। यह यात्रा-वृत्तांत एक शोधार्थी की आँखों से बैतूल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक…
बिहार : डिग्री कॉलेज तो खुल गए, गांधी कहां रह गए?
बिहार सरकार द्वारा 211 प्रखंडों में नए राजकीय डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इन महाविद्यालयों में गांधी विचार को स्थान न मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है। शिक्षा यदि…
भूमि का सवाल : सामाजिक न्याय की कसौटी
आज के दौर में जमीन सर्वाधिक कीमती जिन्स बन गई है। नतीजे में उसे लेकर देशभर में भारी उथल-पुथल, मारकाट मची है और भूमिहीन समाज हाशिए पर खदेड दिया गया है। ऐसे में, किन तौर-तरीकों से जमीन का न्यायपूर्ण, अहिंसक…
‘एथेनॉल क्रांति’ : संभावनाओं में छिपे संकट
पश्चिम एशिया के देशों पर अमरीका द्वारा जबरन थोपी गई लडाई के नतीजे में तेल, ईंधन की भारी कमी और देश के सडक परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के उत्साह ने आजकल खाद्य उत्पादनों से ‘एथेनाल’ बनाने और उससे अर्थव्यवस्था चलाने…
सरदार सरोवर समझौते पर उठे सवाल : मध्यप्रदेश के वैध अधिकारों और हजारों विस्थापितों के पुनर्वास से समझौता न हो – नर्मदा बचाओ आंदोलन
बड़वानी, 11 जुलाई 2026 (सप्रेस)। सरदार सरोवर परियोजना के कारण मध्यप्रदेश में जलमग्न हुई वन भूमि, शासकीय भूमि तथा अन्य सार्वजनिक संसाधनों की भरपाई को लेकर वर्षों से चले आ रहे अंतर्राज्यीय विवाद के बीच हाल ही में हुए समझौते…
हमारे फुटपाथ कौन हजम कर रहा?
आज़ादी के लगभग 80 वर्ष बाद भी यदि नागरिकों को सुरक्षित फुटपाथ के अधिकार के लिए सर्वोच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़े, तो यह हमारे शहरी विकास मॉडल की बड़ी विफलता है। न्यायालय का हालिया फैसला पैदल यात्रियों के अधिकारों…
चंबल घाटी में अहिंसा के लिए विद्यालय
हिंसा केवल बंदूक या संघर्ष का नाम नहीं, बल्कि शोषण, असमानता और अन्याय भी उसके रूप हैं। ऐसे में अहिंसक समाज की स्थापना केवल विचार नहीं, बल्कि निरंतर सामाजिक अभ्यास की मांग करती है। चंबल की धरती से प्रस्तावित ‘अहिंसा…
मध्यप्रदेश में नई मत्स्य नीति की असली कसौटी
मध्यप्रदेश ने नई एकीकृत मत्स्य नीति-2026 और हजारों करोड़ रुपये के निवेश के साथ “ब्लू इकॉनमी” की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। लेकिन उत्पादन और निवेश केंद्रित इस मॉडल के बीच पारंपरिक मछुआरों के अधिकार, आजीविका, सहकारी व्यवस्था और…
























