जनगणना 2027 : डिजिटल युग में भारत की सामाजिक-राजनीतिक पुनर्रचना
किशोर जायसवाल : बूंद-बूंद से भविष्य बचाने वाला जल योद्धा
जल संरक्षण की असली सफलता किसी संरचना के निर्माण में नहीं, बल्कि उसके सामुदायिक स्वामित्व में है। मुंगेर के किशोर जायसवाल ने अपने तीन दशक से अधिक के काम में इसी विचार को आधार बनाया। जलग्रहण विकास से लेकर टिकाऊ…
डॉ. एम.पी. परमेश्वरन : विज्ञान के बहाने समाज को बदलने की कोशिश
विज्ञान, साक्षरता और सामाजिक बदलाव को जनभागीदारी से जोड़ने वाले डॉ. एम.पी. परमेश्वरन की स्मृति विज्ञान को आम लोगों तक ले जाने और वैज्ञानिक चेतना को समाज में फैलाने में लगे रहे प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक और जन विज्ञान आंदोलन के…
दो स्तरों की शिक्षा : बच्चों को बंधुआ बनाने की साज़िश
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों, युवाओं के हाल के प्रदर्शन ने परीक्षा-प्रणाली की बदहाली और ‘नीट’ के ‘पेपर लीक’ के अलावा मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। आखिर शिक्षा के नाम पर क्या किया जा रहा है,…
विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण
मानसून के साथ-साथ स्कूल-कॉलेजों का खुलना और प्रकृति का पुनर्जीवित होना एक समय-चक्र की तरह है। ठीक इसी दौर में युवा विद्यार्थियों को उनके पर्यावरण से जोडने की सरकारी, गैर-सरकारी कवायदें भी की जाती हैं। पर्यावरण से जुड़े तरह-तरह के…
अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026 के लिए आवेदन शुरू, छात्राओं को हर साल मिलेंगे सालाना 30,000 रूपये
बंगलूरू, 10 अगस्त। अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन ने वर्ष 2026–27 के लिए अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति के आवेदन की शुरूआत 10 अगस्त से आंरभ हो गई है। इस योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को तीस हजार रुपये सालाना स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी। योग्य छात्राएं…
शहादत की वह सुबह : सतीश प्रसाद झा और पटना सचिवालय कांड
11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय के पूर्वी द्वार पर तिरंगा फहराने के लिए आगे बढ़े सात विद्यार्थियों पर चली अंग्रेजी हुकूमत की गोलियों ने बिहार के स्वतंत्रता संग्राम को अमर शहादत की कथा दी। इनमें खरहरा गांव के सतीश…
वरिष्ठ आयकर अधिकारी संजय अग्रवाल की पुस्तक ‘F5 जिंदगी का रिफ्रेश बटन’ का विमोचन
वक्ताओं ने कहा: जीवन की छोटी घटनाओं में छिपे अर्थों को समझना और अपने भीतर झांकना जरूरी रिपोर्ट : कुमार सिद्धार्थ इंदौर, 9 अगस्त। कंप्यूटर पर काम करते हुए किसी पन्ने को नए सिरे से देखने के लिए हम जिस…
राजेंद्र माथुर की गांधी-दृष्टि आज की पत्रकारिता और लोकतंत्र के लिए जरूरी : प्रकाश हिंदुस्तानी
हिंदी पत्रकारिता के पुरोधा राजेंद्र माथुर की जयंती पर भोपाल में हुआ ‘माथुर के महात्मा’ विषयक व्याख्यान भोपाल, 9 अगस्त। ‘राजेंद्र माथुर के लिए समाचार-पत्र केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का सशक्त हथियार था। उन्होंने पत्रकारिता…
आदिवासी लोकजीवन की सहजता और सहजीवन का दर्शन
आदिवासी लोकजीवन केवल अभाव और गरीबी की कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सहजीवन, आत्मनिर्भरता और भरोसे की समृद्ध परंपरा भी है। मिट्टी-लकड़ी के घरों से लेकर पशुओं को परिवार का हिस्सा मानने और बिना दरवाजों के रहने तक, आदिवासी…
प्रकृति ही दुनिया का सबसे बड़ा धर्म, इसकी नाराजी का समाधान अगल-बगल नहीं अंदर झांककर खोजना होगा – पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी
संस्था सेवा सुरभि द्वारा आयोजित “क्यों रूठे हुए हैं मेघराज मालवांचल से” विषय पर हुए व्याख्यान में शामिल हुए शहर के पर्यावरणविद और प्रबुद्धजन इंदौर, 7 अगस्त। मालवा में बारिश का बदलता मिजाज केवल मौसम का बदलाव नहीं है,…
























