जेएसए इंडिया ने स्वतंत्र जांच, जवाबदेही और कड़े सुरक्षा उपायों की मांग की भोपाल 9 जून। विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में 8 श्रमिकों तथा गुजरात के सूरत में 4 श्रमिकों की दुखद मृत्यु पर जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (जेएसए इंडिया) ने…
जयपुर, 9 जून। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) राजस्थान इकाई ने राजस्थान में फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र के माध्यम से डॉक्टर बनने के मामले में हुई कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि यह समस्या केवल विदेश से मेडिकल शिक्षा…
गंगा के किनारे बसे बिहार के मुंगेर, खगड़िया और बेगूसराय जिलों के हजारों परिवारों के लिए नदी केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते विस्थापन का कारण बन चुकी है। हर साल गंगा का कटाव सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन…
शंकरगढ़ (प्रयागराज)। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को लेकर जनजागरण के उद्देश्य से मंगल भूमि फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने लोनी नदी की अध्ययन यात्रा शुरू की है। यात्रा के दौरान स्वयंसेवक नदी की वर्तमान स्थिति, जल प्रवाह, प्रदूषण, अतिक्रमण,…
पर्यावरण बचाने की पहल जैव-विविधता को संरक्षित करने से शुरु होती है। जैव-विविधता को समझकर उसे बचाने की कोशिश पर्यावरण को भी चाक-चौबंद रख सकती है। क्या है, जैव-विविधता की अहमियत? इसे कैसे सजाया-संवारा जा सकता है? प्रकृति केवल एक…
पश्चिमी मीडिया ने लगातार उछाला है कि ईरान-इजरायल-अमेरिका के संघर्ष में मुस्लिम देशों का शिया-सुन्नी विभाजन भी अहम भूमिका अदा करता है, जबकि गहराई से देखें तो पूंजी और प्रभाव के सामने साम्प्रदायिकता का यह नजरिया बेकाम साबित होता है।…
समाज और सरकार चाहे तो पर्यावरण को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण अमरीका के टेनेसी और नार्थ कैरोलीना राज्यों की सीमाओं से लगा ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’ है। करीब सौ साल पहले कानून बनाकर प्रकृति को उसके…
विश्व पर्यावरण दिवस केवल पौधे लगाने का संदेश नहीं देता, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का आह्वान करता है। जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपभोग जैसे छोटे-छोटे प्रयास…
पर्यावरण संरक्षण और संतुलन का प्रश्न आज पूरी मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित…
चालीस-पेंतालीस डिग्री सेल्सियस की चपेट में आए भारत, खासकर उत्तर भारत में अब आमफहम जीवन भी कठिन-से-कठिनतर होता जा रहा है। खुद के बनाए विकास के तौर-तरीकों से पैदा हो रहे ऐसे हालातों से आखिर कैसे निपटा जाए? इसी पर…