जनगणना 2027 : डिजिटल युग में भारत की सामाजिक-राजनीतिक पुनर्रचना
फरक्का का हिसाब : गंगा किसकी, पानी किसका और दर्द बिहार का?
गंगा के पानी का सवाल बिहार में केवल बाढ़ और सूखे के बीच का विरोधाभास नहीं, बल्कि खेती, मत्स्य जीवन, भूजल और नदी की पारिस्थितिकी से जुड़ा प्रश्न है। 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की समीक्षा के बीच फरक्का…
भर्ती का धंधा
इधर, नौकरियों और उनमें भर्ती करने की खातिर ली जाने वाली परीक्षाओं ने भारी-भरकम मुनाफा कूटने का एक नया गोरखधंधा पैदा कर दिया है। ध्यान रखें, यह धंधा वैध-अवैध दोनों तरीकों से किया जाता है। अपने शोध की बुनियाद पर…
पानी लौटे तो लौटता है गाँव का भविष्य
हमने विकास को अक्सर इस सवाल से मापा है कि कितना पानी निकाला जा सकता है, कितनी परियोजनाएँ बनीं और कितना धन खर्च हुआ। अब सवाल बदलने का समय है—एक भू-दृश्य टिकाऊ रूप से कितना पानी सँभाल सकता है? इस…
भोटकोशी बाढ़ से सबक लेकर हिमालयी देशों को संयुक्त मंच बनाना चाहिए : पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट
राष्ट्रीय हिमालय आयोग के गठन की पैरवी, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोग बनाने की मांग चमोली (उत्तराखंड), 28 अगस्त। प्रख्यात पर्यावरणविद्, चिपको आंदोलन के नेता और गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित चंडी प्रसाद भट्ट ने शुक्रवार को नेपाल के रसुवा…
नेपाल प्राकृतिक आपदा : हिमालय अब जलवायु परिवर्तन का बोझ नहीं उठा सकता
हिमालय में बार-बार सामने आ रही प्राकृतिक आपदाएं अब महज स्थानीय घटनाएं नहीं रह गई हैं। नेपाल की हालिया त्रासदी ने एक बार फिर चेताया है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और बदलता मानसून हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी पर भारी…
भू-सांस्कृतिक मानचित्रण : स्वदेशी ज्ञान से सतत विकास की ओर
जब विकास प्रकृति, समाज और मनुष्य के बीच दूरी बढ़ा रहा है, तब स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक जीवन-पद्धतियों से सीखने की जरूरत बढ़ गई है। भू-सांस्कृतिक मानचित्रण इसी समग्र दृष्टि का माध्यम है, जो भूमि, जल, जंगल, कृषि, संस्कृति, आजीविका…
किशोर जायसवाल : बूंद-बूंद से भविष्य बचाने वाला जल योद्धा
जल संरक्षण की असली सफलता किसी संरचना के निर्माण में नहीं, बल्कि उसके सामुदायिक स्वामित्व में है। मुंगेर के किशोर जायसवाल ने अपने तीन दशक से अधिक के काम में इसी विचार को आधार बनाया। जलग्रहण विकास से लेकर टिकाऊ…
डॉ. एम.पी. परमेश्वरन : विज्ञान के बहाने समाज को बदलने की कोशिश
विज्ञान, साक्षरता और सामाजिक बदलाव को जनभागीदारी से जोड़ने वाले डॉ. एम.पी. परमेश्वरन की स्मृति विज्ञान को आम लोगों तक ले जाने और वैज्ञानिक चेतना को समाज में फैलाने में लगे रहे प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक और जन विज्ञान आंदोलन के…
दो स्तरों की शिक्षा : बच्चों को बंधुआ बनाने की साज़िश
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों, युवाओं के हाल के प्रदर्शन ने परीक्षा-प्रणाली की बदहाली और ‘नीट’ के ‘पेपर लीक’ के अलावा मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। आखिर शिक्षा के नाम पर क्या किया जा रहा है,…
विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण
मानसून के साथ-साथ स्कूल-कॉलेजों का खुलना और प्रकृति का पुनर्जीवित होना एक समय-चक्र की तरह है। ठीक इसी दौर में युवा विद्यार्थियों को उनके पर्यावरण से जोडने की सरकारी, गैर-सरकारी कवायदें भी की जाती हैं। पर्यावरण से जुड़े तरह-तरह के…
























