10 दिसम्बर : मानवाधिकार दिवस
समाज में मानवाधिकारों के होने वाले उल्लंघन के प्रति अगर मानव ही जागरूक नहीं है तो फिर इनका औचित्य क्या है? देखे तो पता चलेगा की कितने मानवाधिकारों का हनन मानव के द्वारा ही...
वीजू कृष्णन
रोटी, कपडा और मकान की तरह बिजली भी जीवन की बुनियादी जरूरत बन गई है। जाहिर है, इन चारों अपरिहार्य उपादानों ने सेठों को अकूत पूंजी कूटने के भरपूर अवसर दिए हैं। बिजली क्षेत्र में सरकारें, तरह-तरह के...
देखने, छूने, सूंघने और यदा-कदा चखने की इंद्रियों की मदद से होने वाली खरीद-फरोख्त को धता बताते हुए आजकल आनलाइन का चलन है जिसमें सीधे ऑर्डर करके जरूरत का सामान मंगाया जाता है। सरकार से लगाकर तमाम शोध संस्थान...
पूंजी के फलने-फूलने के तौर-तरीकों में एक है, इंसानों को इंसानियत से बेदखल करके उन्हें मशीनों में तब्दील कर देना। मानवीय गुणों से वंचित मशीन-रूपी इंसान पूंजी के उत्पादन और मुनाफा कूटने के लिए बेहद मुफीद होता है। क्या...
आंदोलन को धार देने के लिए अगला राष्ट्रीय सम्मेलन कहलगांव में
चार दशक बाद फिर से नई चुनौतियों से लड़ने के लिए गंगा मुक्ति आंदोलन फिर से मैदान में आ चुका है। बिहार के मुजफ्फरपुर के चंद्रशेखर भवन में गंगा...
आज़म खान
दुनिया की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी से चार दशक पहले निपटने वाले भोपाल में इसे लेकर आज क्या हो रहा है? क्या सरकारों, सेठों और समाज ने अपनी-अपनी जिम्मेदारी सलीके से निभाई है? प्रस्तुत है, इसी की पड़ताल करता...
प्रकृति प्रदत्त ज्ञानेंद्रियों और मनुष्य की सृजनात्मक एवं विध्वंसात्मक प्रवृत्तियों की निरन्तर जुगलबंदी ने आज की दुनिया को एक ऐसे मुकाम पर पहुंचा दिया है कि जहां तक पहुंच कर हम समूची सभ्यता की सृजनात्मक शक्ति बढ़ा और नष्ट-भ्रष्ट...
भारती पंडित
फिल्म समीक्षा
मीडिया में तो राजनीति का दखल हम देख ही रहे थे, अब फिल्मों में राजनीतिक दखल के क्या मायने होते हैं, इस फिल्म को देखने से आप समझ पाएँगे | सीधे और छुपे रूप से नफरत को...
मालवा निमाड़ के खेतों में पैदा होने वाली सरसों के साथ बैंगन, सोयाबीन आदि जैसी फसलों और साग-भाजी के साथ फल आपकी थाली में परोसे जाएं और इनके शाकाहारी या मांसाहार होने का भेद नहीं कर पाए तो क्या होगा? ऐसे...
जिन वन और वन्यप्राणियों को इंसानी हस्तक्षेप से बचाने की खातिर समूची सरकारी ताकत जंगलों में बसे इक्का-दुक्का गांवों को खदेड़ने में लगी है, उन्हीं वनों को दान-दक्षिणा में पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है। क्या इस तरह की...