विनायक नरहरि भावे यानी विनोबा भावे (11सितंबर 1895-15 नवंबर 1982) की आज 129 वीं जयंती है। आज विनोबा न सिर्फ इसलिए प्रासंगिक हैं कि वे हिंदू धर्म ही नहीं, इस्लाम, ईसाई और अन्य धर्मों के उदार और अप्रतिम व्याख्याकार...
गांधीवादी चिंतक और निर्वासित तिब्बत सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री श्री सामदोंग रिनपोछे करेंगे उद्घाटन
सेवाग्राम। सर्व सेवा संघ (अखिल भारत सर्वोदय मंडल) का 90वां अधिवेशन आचार्य विनोबा भावे की जयंती पर 11 और 12 सितम्बर को प्रस्थान आश्रम, पठानकोट में...
11 सितंबर : विनोबा भावे जयंती
महात्मा गांधी की आध्यात्मिक, रचनात्मक विरासत सम्भालने वाले विनोबा भावे ने गांधी के जाने के बाद सेवाग्राम (वर्धा) में पूर्व-निर्धारित रचनात्मक कार्यकर्ताओं की राष्ट्रीय बैठक में तो अधिक कुछ नहीं कहा, लेकिन बाद...
भोपाल, 5 सितंबर। वर्ष 2024 का प्रतिष्ठित अमलप्रभा सर्वोदय पुरस्कार मध्यप्रदेश की सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती दमयंती पाणी, गांधी आश्रम, छतरपुर को प्रदान किया जाएगा। असम के सर्वोदय ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में पुरस्कार प्रदान किये जाने...
तरह-तरह के प्राकृतिक और इंसानी धतकरमों की ‘कृपा’ से दिनों-दिन बदहाल होती दुनिया को बचाने और सही-सलामत रखने की कोशिशें अंतत: महात्मा गांधी के विचारों पर आकर टिकती हैं। आखिर क्या हैं, बापू की सहज, सरल सीख-सलाहें? बता...
126 वां जयंती वर्ष : दादा धर्माधिकारी
मनुष्य एक-दूसरे के समीप होते हुए भी एक-दूसरे के साथ जीते नहीं हैं। इसमें चन्द बाधाएं हैं। एक है - मालिकी और मिल्कियत। दूसरा है - संप्रदाय या धर्म। तीसरा - जाति। चौथा...
गांधीवादी, समाजकर्मी शोभना रानाडे का 99 वर्ष में निधन
पुणे, 4 अगस्त। गांधीवादी विचारों की प्रचारक, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, दूरदर्शी गांधीवादी, पद्मभूषण श्रीमती शोभना रानडे का 4 अगस्त 24 को प्रातः पुणे में निधन हो गया। पूना में जन्मीं शोभना...
पचास के दशक में विनोबा भावे की अगुआई में शुरु हुआ ‘भूदान आंदोलन’ अब किस परिस्थिति में है? क्या उसने अपने घोषित उद्देश्यों में कुछ हासिल किया है? आज भूमि वितरण के इस महायज्ञ में क्या जोडा जा...
कुमारप्पापुरम में दो दिवसीय खादी सभा प्रारंभ
वर्धा 22 फरवरी। खादी एक समग्र और पूरिपूर्ण विचार है। इसकी बुनियाद सत्य और अहिंसा है। खादी विचार को टिकाने के लिए सरकारी तंत्र से मुक्ति आवश्यक है। वास्तव में खादी बगावत का...
आज से 76 साल पहले महात्मा गांधी हम सबसे सदा के लिए विदा हुए थे। उनके जाने के बाद का समय हमारे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास का समय रहा है, लेकिन इस दौर में गांधी एक प्रस्थान–बिन्दु...