14 अप्रैल – डॉ. भीमराव अंबेडकर की130वीं जयंती पर विशेष

सुदर्शन सोलंकी

स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा, बौद्ध धर्म, विज्ञानवाद, मानवतावाद, सत्य, अहिंसा आदि के विषय अम्बेडकरवाद के सिद्धान्त हैं। दलितों में सामाजिक सुधार, भारत में बौद्ध धर्म का प्रचार एवं प्रचार, भारतीय संविधान में निहीत अधिकारों तथा मौलिक हकों की रक्षा करना, एक नैतिक तथा जातिमुक्त समाज की रचना और भारत देश की प्रगति प्रमुख उद्देश के रूप में सम्मिलित है। अम्बेडकरवाद सामाजिक, राजनितिक व धार्मिक विचारधारा हैं।

भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में अंबेडकर नगर (महु) मध्य प्रदेश के एक अस्पृश्य परिवार में हुआ था। वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14वीं व अंतिम संतान थे। इनका परिवार कबीर पंथ को मानने वाला मराठी मूल का था और वर्तमान महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में आंबडवे गाँव का निवासी था। वे हिंदू महार जाति से संबंध रखते थे, जो तब अछूत कही जाती थी और इस कारण उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव सहन करना पड़ता था। अंबेडकर प्रतिभाशाली छात्र थे। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स दोनों ही विश्वविद्यालयों से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्राप्त कीं तथा विधि, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में शोध कार्य भी किए थे। व्यावसायिक जीवन के आरम्भ में ये अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे एवं वकालत भी की तथा बाद का जीवन राजनीतिक गतिविधियों में अधिक बीता। इसके बाद अंबेडकर भारत की स्वतन्त्रता के लिए प्रचार और चर्चाओं में शामिल हो गए और पत्रिकाओं को प्रकाशित करने, राजनीतिक अधिकारों की वकालत करने और दलितों के लिए सामाजिक स्वतंत्रता की इन्होंने वकालत की।

भारत रत्न डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने अपने जीवन के 65 वर्षों में देश को सामाजिक,आर्थिक,राजनीतिक,शैक्षणिक,धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक,  औद्योगिक,   संवैधानिक इत्यादि विभिन्न क्षेत्रों में अनगिनत कार्य करके राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन्होनें सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए मनुस्मृति दहन (1927), महाड सत्याग्रह (वर्ष 1928), नासिक सत्याग्रह (वर्ष 1930), येवला की गर्जना (वर्ष 1935) आदि आंदोलन का किए। जात पांत तोडक मंडल (वर्ष 1937) लाहौर, के अधिवेशन के लिये तैयार अपने अभिभाषण को जातिभेद निर्मूलन नामक अपने ग्रन्थ में सम्मिलित कर समाज को धर्मग्रंथों में व्याप्त मिथ्या, अंधविश्वास से मुक्ति दिलाने का कार्य किया। अंबेडकर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके नेता महात्मा गांधी की भी आलोचना की, उन्होंने उन पर अछूत समुदाय को एक करुणा की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने का आरोप लगाया था।

डॉ. अंबेडकर के अलावा भारतीय संविधान की रचना हेतु कोई अन्य विशेषज्ञ भारत में नहीं था। अतः सर्वसम्मति से डॉ. अंबेडकर को संविधान सभा की प्रारूप समिति का अध्यक्ष चुना गया। 26 नवंबर 1949 को डॉ. अंबेडकर द्वारा रचित संविधान पारित किया गया। भारतीय संविधान को 02 वर्ष 11 महीने और 17 दिन के कठिन परिश्रम से तैयार कर 26 नवंबर 1949 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को सौंप दिया।

हिन्दू धर्म में व्याप्त कुरीतियों और छुआछूत की प्रथा से तंग आकार सन 1956 में इन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया था।

डॉ. अंबेडकर ही एकमात्र भारतीय हैं जिनकी प्रतिमा लंदन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ लगी हुई है। बाबा साहेब के निजी पुस्तकालय “राजगृह” में 50,000 से भी अधिक उनकी किताबें थी और यह विश्व का सबसे बड़ा निजी पुस्तकालय था। डॉ. बाबा साहेब द्वारा लिखी गई पुस्तक “waiting for a visa” कोलंबिया विश्वविद्यालय में टेक्स्ट बुक है। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने 2004 में विश्व के शीर्ष 100 विद्वानों की सूची बनाई थी और उसमें पहला नाम डॉ. भीमराव अंबेडकर का था। लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से “डॉक्टर ऑल सायन्स” नामक डॉक्टरेट पदवी प्राप्त करने वाले बाबा साहेब विश्व के पहले और एकमात्र महापुरूष हैं। गवर्नर लॉर्ड लिनलिथगो और महात्मा गांधी का मानना था कि बाबासाहेब 500 स्नातकों तथा हजारों विद्वानों से भी अधिक बुद्धिमान हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए “The Makers of the Universe” नामक जातिगत सर्वेक्षण के आधार पर पिछले 10 हजार वर्षो के शीर्ष 100 मानवतावादी विश्वमानवों की सूची बनाई गई थी जिसमें चौथा नाम डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का था।

अंबेडकर की विचारधारा तथा दर्शन को इनके अनुयायियों ने अंबेडकरवाद माना व इस पर चलने लगे। स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा, बौद्ध धर्म, विज्ञानवाद, मानवतावाद, सत्य, अहिंसा आदि के विषय अम्बेडकरवाद के सिद्धान्त हैं। दलितों में सामाजिक सुधार, भारत में बौद्ध धर्म का प्रचार एवं प्रचार, भारतीय संविधान में निहीत अधिकारों तथा मौलिक हकों की रक्षा करना, एक नैतिक तथा जातिमुक्त समाज की रचना और भारत देश की प्रगति  प्रमुख उद्देश के रूप में सम्मिलित है। अम्बेडकरवाद सामाजिक, राजनितिक व धार्मिक विचारधारा हैं।

बाबासाहेब द्वारा लिखी गई पुस्तक “waiting for a visa” कोलंबिया विश्वविद्यालय में टेक्स्ट बुक है। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने 2004 में विश्व के शीर्ष 100 विद्वानों की सूची बनाई थी जिसमें पहला नाम डॉ. भीमराव अम्बेडकर का था।

6 दिसंबर 1956 को इनकी मृत्यु हो गई। सन 1990 में, उन्हें भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से मरणोपरांत सम्मानित किया गया था। (सप्रेस)

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