विकल्प संगम मंच से जुड़े देशभर के 65 संगठनों ने जारी किया संयुक्त बयान
सप्रेसमीडिया.इन।
सामाजिक एवं पारिस्थिकीय रूप से समता आधारित बेहतर और वैकल्पिक तरीकों पर काम करने वाले संस्थाओं के मंच विकल्प संगम ने कोराना महामारी को नियंत्रित करने एवं करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका पर पड़ रहे दुष्प्रभाव से निपटने के लिए तात्कालिक एवं दीर्घकालीन उपाय सुझाये पर हैं और इनका क्रियान्वयन जल्द से जल्द हो। साथ ही यह ही वर्तमान में देशभर में चल रहे गैर आवश्यक कार्यो जैसे विलासी सेंट्रल विस्टा निर्माण कार्य को निरस्त कर उपलब्ध संसाधनों को आपातकालीन कोविड राहत में लगाया जाना सुनिश्चित किया जाए। देश के 65 प्रमुख स्वयंसेवी संगठन और आंदोलन/समूह, जो देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत हैं और विकल्प संगम कोर ग्रुप का हिस्सा हैं, ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर मांग की है।
बयान में कहा गया है कि कोविड महामारी भारत के लगभग सभी परिवारों को किसी न किसी रूप में बुरी तरीके से प्रभावित करते हुए रौंद रही हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की दयनीय स्थिति और केंद्र तथा राज्य सरकारों के द्वारा विशेषज्ञों के सुझावों और चेतावनियों की लगातार अवहेलना से स्वास्थ्य हालात बुरे होते गए है। देश में इस महामारी की दूसरी लहर का भयानक असर पूरी तरीके से एक राजनैतिक विफलता है और सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराये जाने की ज़रूरत है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ की प्रोफेसर और विकल्प संगम कोर ग्रुप की सदस्या ऋतु प्रिया ने कहा कि “अब हमें अपना ध्यान निश्चित ही मानव और पर्यावरण के स्वास्थ्य और बेहतरी पर केंद्रित करना चाहिये।”
देश भर के प्रमुख स्वयंसेवी संगठन और आंदोलन/समूह ने कोविड की रोकथाम, स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बहानी आदि के संदर्भ में कुछ तात्कालिक और दीर्घकालिक उपाय सुझाये है उन तात्कालिक सुझावों में मुख्य है :
- ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में कम लक्षणों वाले मरीजों के लिये प्राथमिक स्तर तथा घर पर ऑक्सीजन एवं अन्य श्वसन सम्बन्धी देखभाल की सुविधा को सुनिश्चित किया जाए।
- विश्वसनीय वैज्ञानिक अध्ययन और लंबे अनुभव के आधार पर चिकित्सकीय उपाय के बारे में जागरूकता का प्रसार तथा टीका लगवाने वालों के लिए टीकाकरण सुनिश्चित कर देखभाल की सुविधा प्रदान किया जाये।
- स्वास्थ्य के लिए विभिन्न तात्कालिक तथा दीर्घकालीन उपाय जैसे बेहतर प्रतिरोधक क्षमता तथा उपचार करने वाला विभिन्न पारंपरिक तथा आधुनिक चिकित्सा प्रणाली को सर्वसुलभ बनाने के उपाय किये जाये।
इसके अलावा कुछ दीर्घकालीन सुझाव भी सुझाए गए है तथा मांग की गई कि शीघ्र ही इन सुझावों पर क्रियान्वयन किया जाए। उनमें सुझावों में है:
- स्थानीय, आत्मनिर्भर आजीविका के विकल्प, जो पारिस्थतिकीय रूप से सतत हो, को बढ़ावा दिया जाये,
- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को पुनर्जीवित कर लोकतांत्रिक बनाया जाये,
- मानसिक स्वास्थ्य और कॉउंसलिंग सेवाओं का प्रसार किया जायें,
- प्राकृतिक पर्यावरण-तंत्र के संरक्षण और संवर्धन को प्राथमिकता दिया जाये और सार्वजनिक भूमि और उत्पादक संसाधन के दोहन पर स्थानीय स्वशासन तंत्र का अधिकार हो।
विकल्प संगम की सदस्य और जागोरी ग्रामीण संगठन की आभा भैया ने कहा कि “इस महामारी से आबादी का सबसे संवेदनशील तबका बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इन तबको में बुजुर्ग, बच्चे, दिहारी कामगार, ट्रांसजेंडर तथा यौनकर्मी, गर्भवती तथा धात्री महिला, किसान, मछुआरे, चरवाहे आदि उल्लेखनीय है। इसके अलावा खासकर महिला, दलित तथा आदिवासियों के लिए मज़दूरी, भोजन तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
संयुक्त रूप से बयान जारी करने वाले देश भर के स्वयंसेवी संगठन और आंदोलन/समूहों में विकास विकल्प (दिल्ली), डेक्कन डेवलपमेंट सोसाइटी (तेलंगाना), अशोका ट्रस्ट (बंगलौर), सेंटर फॉर एनवायरमेंट एजुकेशन ( अहमदाबाद), सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज (दिल्ली), एकता परिषद, ग्रीनपीस इंडिया (बेंगलुरु), कल्पवृक्ष (महाराष्ट्र), लद्दाख कला और मीडिया संगठन (लद्दाख), मजदूर किसान शक्ति संगठन (राजस्थान), राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान (राष्ट्रीय),एक्शन फार क्म्यूनिटी आर्गेनाइजेशन, रिहेबिल्टेशन एंड डेवलपमेंट, भूमि कॉलेज (बेंगलुरु), ब्लू रिबन मूवमेंट (मुंबई), द यूथ कलेक्टिव (दिल्ली), मध्यम (दिल्ली), माटी (उत्तराखंड), शिक्षान्तर (राजस्थान), डियर पार्क (हिमाचल प्रदेश), धरमित्र (महाराष्ट्र), जीन अभियान (दिल्ली), गूंज (दिल्ली), नेशनल एलायंस आफ पीपुल्स मूवमेंट्स, सेंटर फार एजुकेशन एंड डाक्यूमेंटेशन (मुंबई), पीपल्स साइंस इंस्टीट्यूट (उत्तराखंड), सहजीवन (कच्छ), सम्भावना (हिमाचल प्रदेश), संवेदना (महाराष्ट्र),संगमा (बेंगलुरु),संगत (दिल्ली), टिम्बकटू कलेक्टिव (आंध्र प्रदेश), तितली ट्रस्ट (उत्तराखंड), उर्मुल (राजस्थान), वृक्षामित्र (महाराष्ट्र), महिला किसान अधिकार मंच (राष्ट्रीय), लद्दाख छात्र पर्यावरण और सांस्कृतिक आंदोलन (लद्दाख), नॉर्थ ईस्ट स्लो फ़ूड एंड एग्रोबायोडाइवर्सिटी सोसायटी (मेघालय), सिक्किम स्वदेशी लेप्चा महिला संघ, वाटरशेड सपोर्ट सर्विसेज एंड एक्टिविटीज़ नेटवर्क (आंध्र प्रदेश / तेलंगाना), महालिर एसोसिएशन फॉर लिटरेसी, अवेयरनेस एंड राइट्स, ट्रेवलर विश्वविद्यालय आदि संस्थाएं/संगठन/ आंदोलन/समूह शामिल है।