
कुछ साल पहले हमारे जीवन को आसान बनाने की खातिर आए मोबाइल फोन ने अब अपनी तकनीक से कई तरह के संकट खड़े कर दिए हैं। इनमें से एक है, ‘ऑन लाइन गेमिंग’ जिसने बच्चों तक को अपनी चपेट में ले लिया है। क्या हैं, इसके परिणाम? इससे कैसे निपटा जा सकेगा?
डिजिटल इंडिया फाउंडेशन की एक हाल की रिपार्ट के अनुसार भारत में ‘आनलाईन गैंबलिंग’ या जुआ बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे डिजिटल प्लेटफार्म पर तीन महीनों में 160 करोड़ विजिट दर्ज किए गए हैं। सरकार द्वारा इसे रोकने या नियंत्रित करने के तमाम प्रयासों के बावजूद अनेक अवैध कारोबारी अपनी गतिविधियां इस दिशा में बढ़ा रहे हैं। इसका समाज, विशेषकर युवाओं और बच्चों पर बहुत प्रतिकूल असर पड़ा है।
‘द लांसेट’ पत्रिका में प्रकाशित रिचर्ड आरमिटेंड के अध्ययन के अनुसार आनलाईन जुए का बच्चों के मानसिक, भावनात्मक तथा सामाजिक स्वास्थ्य और स्कूली उपलब्धि पर बहुत प्रतिकूल असर पड़ता है। नतीजे में उनकी अनेक लतों में फंसने की संभावना बढ़ती है। नई तकनीक के आगमन से अनेक लाभ मिल सकते हैं, पर यदि समुचित सावधानियां न बरती जाएं तो कई तरह की गंभीर क्षति भी हो सकती है। मोबाइल फोन से बहुत सी सुविधाएं प्राप्त होती हैं, अनेक लाभ हैं, पर इसे कई तरह के जुए के खेल का माध्यम भी बनाया जा रहा है। ताश ही नहीं, लूडो और क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेलों को भी ऐसा रूप दिया जा रहा है जो जुए के विभिन्न रूप ही हैं।
इस नए तरह के जुए के जाल में अनेक किशोर व युवा फंसते चले जा रहे हैं। यहां तक कि दूर-दूर के गांवों में भी ऐसा हो रहा है। इस तरह के जुए में एक बार पैसे हारने के बाद इन किशोरों या युवकों में यह गहरी इच्छा रहती है कि कम-से-कम जो गंवाया है उतना तो वापस कर लिया जाए। इस उम्मीद में वे और पैसे लगाते हैं, पर प्रायः उनका घाटा बढ़ता ही जाता है। इस कारण वे बहुत तनावग्रस्त हो जाते हैं और कभी-कभी तो अपने घर-परिवार से ही कुछ पैसा इधर-उधर कर जुए में डुबोते हैं। कई बार तो बच्चे भी इस जाल में फंस जाते हैं। हालांकि इसके लिए एक खास आयु वर्ग को ही अनुमति दी जाती है, पर कई बार इसका उल्लंघन किसी-न-किसी तिकड़म से किया जाता है।
इस कारण अनेक बच्चों का ध्यान न केवल अपनी पढ़ाई-लिखाई से हट जाता है, अपितु वे अनेक तरह के तनावों का शिकार भी हो जाते हैं और जो उम्र अच्छे जीवन के लिए तैयारी की होती है, उसी में वे बर्बादी की ओर बढ़ने लगते हैं। यदि उन पर शक कर घर-परिवार के बड़े लोग उन्हें रोकते हैं या कुछ कहते हैं तो किशोर बहुत जल्दी तनावग्रस्त हो जाते हैं व उल्टी-सीधी कहने लगते हैं। इस कारण अनेक माता-पिता बहुत परेशान रहते हैं। एक महिला ने तो यहां तक कहा कि अपने बड़े हो रहे बच्चे की इस लत से वह इतनी परेशान हो गई हैं कि उसने दस हजार रुपए का मोबाइल ही गुस्से में तोड़ दिया, पर बच्चे ने फिर भी पूरी तरह इस आदत को छोड़ा नहीं।
हाल ही में जब यह लेखक बुंदेलखंड क्षेत्र की अनेक महिलाओं से नशे को कम करने के उपायों पर बातचीत कर रहा था, तो उन्होंने कहा कि नशा करने का अभियान आप अवश्य चलाएं, पर उसके साथ जुए को कम करने के प्रयासों को भी जोड़ लीजिए। इस बारे में कुछ और पूछताछ करने पर पता चला कि कई बार जुए के खेल में झगड़े, गाली-गलौच, धमकियों की स्थिति भी आ जाती है। किसी गांव में बैठा अबोध किशोर इसके बारे में किसी को चाहे न बताए, पर अंदर-ही-अंदर उसके तनाव बढ़ते जाते हैं और उसे अन्य भीषण स्थिति की ओर भी ले जाते हैं। इस तरह के अनुभवों से गुजर चुके कुछ लोगों ने बताया कि शायद कुछ वयस्क लोग इस तरह की लत में अपना संतुलन बनाए रखते हों, पर जो किशोर व कच्ची उम्र के युवा हैं, उनका संतुलन प्रायः बिगड़ जाता है।
इसके अतिरिक्त ऐसे अनुभवों से गुजर चुके कुछ व्यक्तियों का कहना है कि केवल जुए वाले ‘ऑन लाइन’ खेलों के कारण ही तनाव की समस्या नहीं है। कुछ ऐसे खेल भी हैं जो जुए से न जुड़े होने के बावजूद तनाव व हिंसा का कारण बनते हैं। इन खेलों में बुरी तरह लीन होने या लत पड़ने के कारण अनेक बच्चों व किशोरों के मस्तिष्क का संतुलन बिगड़ जाता है। इस बारे में कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्होंने अपने आसपास ही यह होते हुए देखा है।
इसके अतिरिक्त कुछ लोगों ने यह शिकायत भी की है कि मोबाइल पर अश्लील चित्र या वीडियो बहुत अधिक देखने के कारण भी अनेक समस्याएं बढ़ रही हैं। बच्चे व किशोर अनेक तनावों व ऐसी सोच से त्रस्त हो रहे हैं, जिसे ठीक से समझने के लिए वे कच्ची उम्र में मानसिक व शारीरिक तौर पर तैयार ही नहीं हैं। इस कारण महिला-विरोधी यौन हिंसा दूर-दराज के गांवों में भी बढ़ सकती है। इस तरह की विभिन्न समस्याएं हाथ से बाहर निकल जाएं, इससे पहले इन्हें न्यूनतम करने की सभी संभावनाओं पर भली-भांति विचार करते हुए उचित उपाय निकालने चाहिए व इसके आधार पर एक अभियान द्वारा इन सभी खतरनाक संभावनाओं व क्षतियों को न्यूनतम करना चाहिए। (सप्रेस)